Thursday, 4 July 2013

गांधीवाद का मुखौटा पहन कांग्रेस अपनी कुरुपता छुपाना चाहती है



 





कांग्रेस अब गांधी के विचारों और आदर्शों को मानेगी। अर्थात सौ चूहे खा कर बिल्ली हज को जा रही है। लाखों कराड़ो के घोटालों के सच को छुपा कर अब पार्टी गांधी के सत्य को आत्मसात कर रही है। अपने विरोधियों से निपटने के लिए झूठ, फरेब का सहारा लेने वाली पार्टी, अब अहिंसक हो गयी है। अर्थात उसके विचार सात्विक हो गये है। उसके मन में अब कटुता नहीं, करुणा, प्रेम और सहिष्णुता  का समावेश हो गया है। पार्टी नेता अब सादगी से रहेंगे । सादा जीवन जीने के पूर्व अपनी सारी सम्पति देश को दान कर देंगे। क्योंकि  गांधी विचारधारा अतिशय धन संचय को निषेध मानती है। अधिकाधिक भौतिक सुखों और साधनों के उपयोग और उपभोग को  वर्जित मानती है
‘ कांग्रेस अब गांधी की विचारधारा पर चलेगी। ‘ यह बात पार्टी के सर्वमान्य व सर्वोच्चा नेता या मठाधीश ने कांग्रेस पार्टी के नये पदाधिकारियों के समक्ष कही। उस अनुचर मंडली ने उनके उदबोघन का करतल ध्वनि से स्वागत किया। जिस गांधी की कांग्रेस को स्वामी भक्तों का एक दल बना दिया हों, वहां तर्क और प्रति प्रश्न की अपेक्षा की नहीं जा सकती। ऐसी जगह विचारमंथन नहीं होता। स्वामी के आदेश पर बहस नहीं होती। जो कुछ वे कहते हैं, वह आंख मूंद कर स्वीकार किया जाता है। निश्चय ही ऐसी कांग्रेस का गांधी की विचारधारा से लेना देना नहीं है। विचारधाराशून्य दल है। जिसका मात्र एक ही प्रयोजन है- गलत साधनों का उपयोग कर सता पर नियंत्रण करों और सता का भरपूर उपयोग करो। छल-कपट से खूब धन संपदा एकत्रित करों। जनता से सदैव सच को छुपाते रहो। विपक्ष यदि एक पार्टी के भद्दे और करुप चेहरे को जनता के समक्ष दिखाने का प्रयास करें, तब विपक्षी नेताओं पर अनुचित वाक्य बाणों से प्रहार करो। सरकार के अधिन रहने वाली जांच संस्थाओं का अनुचित उपयोग करते हुए उनको घेरने का प्रयास करो।
अनुचर मंड़ली के विशिष्ट सदस्य ने उनके विचारो को नया आयाम देते हुए सार्वजनिक रुप से एक बहुत ही आपतिजनक व विद्वेषपूर्ण टिप्पणी कर दी- ‘ अब इस देश में दो ही विचारधारा रहेगी-’गांधी की विचारधारा और दूसरा गोड़से की विचारधारा।’ अपने विरोधी पर कटाक्ष करने की यह निर्लज्ज व धूर्त कोशिश थी। इस कोशिश के तहत जनमानस में भ्रम की स्थिति उत्पन्न करना था। उनका प्रयोजन स्पष्ट है- हम भारतीय समाज को जोड़ना नहीं, तोड़ना चाहते हैं। गांधी ने भारतीय समाज को जोड़ा होगा, हम ऐसा नहीं कर सकते। समाज में विभ्रम व कुटता की स्थिति उत्पन्न करने से ही हमे वोट मिलते हैं। सतासुख मिलता है। गांधी को सता से मतलब नहीं था, इसलिए वे अपने आदर्शों व सिद्धान्तों में जीते थे। दरअसल, हमे गांधी का सिर्फ नाम का उपयोग करना चाहते, उनके सिद्धान्तों और आदर्शों को आत्मसात नहीं करना चाहते।
अत: गांधी और गोडसे की बात को यदि वास्तव में प्रमाणित करना चाहते हों, तो सार्वजनिक बहस में भाग लेने के लिए जनता के बीच आओ। जनता के प्रश्नों का जवाब दों। मुखौटा पहन लेने से उस सच से नहीं भाग सकते, जिसे जनता जानना चाहती है।
नो वर्षों से आप इस देश पर शासन कर रहे हैं। इन वर्षों में आपने गांधी के विचारों और आदर्शों को क्यों नहीं अपनाया ? इतनी अवधि तक इससे आपने परहेज क्यों किया और अब चुनाव जीतने के लिए गांधी का नाम क्यों ले रहे हैं? यदि आप वास्तव में गांधी के सत्य को आत्मसात करना चाहते हैं, तो बताएं लाखों करोड़ के घपले, घोटालें आपके शासन के दौरान हुए हैं, उसके मुख्य अपरधी कौन है? वह लूटा हुआ धन कहां है?
कोयला घोटाले के कारण देश की महत्वाकांक्षी बिजली परियोजनाएं प्रभावित हुई।  बिजली की कमी से औद्योगिक उत्पादन कम हो गया। उद्योगों में मंदी आ गयी। देश का औद्योगिक विकास रुक गया। फलत: नये रोजगारों का सृजन नहीं हो पाया। इस प्रश्न का उत्तर दीजिये कि करोड़ों नव युवकों को नये रोजगार से वंचित किया, उसके दोषी वे लोग नहीं हैं, जिसने कोयला घोटालें में मुख्य भूमिका निभायी और देश की जनता के साथ बहुत बड़ा छल किया ? देश के नवयुवक इस हकीकत को जानते हैं कि आपकी सरकार के नो वर्षों के शासन के दौरान मात्र नो लाख नये रोजगारों का सृजन हुआ, जबकि पिछली सरकार ने छ: वर्ष के शासन काल में नो करोड़ रोजगारों का सृजन किया। अर्थात प्रति वर्ष डेढ़ करोड़। अगर इस तथ्य से तुलना की जाय तो आपकी सरकार को लगभग पंद्रह करोड़ युवको को रोजगार मुहैया कराना था, जो आप नहीं करा पाये। इस तरह आपने लगभग चौदह करोड़ नवयुवकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है। अब पुन: सता पर नियंत्रण कर के इस संख्या को क्या बढ़ाना चाहते हैं? क्योंकि आपका पूरा ध्यान  अब भी स्थायी रोजगार सृजन पर नहीं है। खाद्य सुरक्षा जैसे बिल ला कर सार्वजनिक धन की बरबादी करने पर तुले हैं, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ेगा। जनता को लाभ कम होगा, परन्तु राजकोषीय घाटा बढ़ने से महंगार्इ का अतिरिक्त भार जनता को वहन करना पडे़गा।
विपक्षी दल पर मात्र गोड़से विशेषण लगा कर अपनी कमजोरियों को छुपाया नहीं जा सकता। देश के विभिन्न शहरों में आपके शासनकाल के दौरान जो बम्ब विस्फोट हुए हैं, उसमें हजारों नागरिक हताहत हुए हैं। आप इस तथ्य को सार्वजनिक कीजिये कि आप विभिन्न बम्ब विस्फोट करने वाले कितने आतंकवादियों को पकड़ पाये? देश जानना चाहता है कि वे अपराधी कहां छुपे हुए हैं? उन्हें किसने आश्रय दे रखा है? आपकी सरकार देश को सुदृढ़ आंतरिक सुरक्षा देने में असफल रही है। किसी भी आतंकी की घटना को रोका नहीं जा सका, क्योंकि गुप्तचर संस्थाएं प्रभावी ढंग से कार्य नहीं कर रही है। वे क्रेगी भी क्यों, जब इशरत जहां मामले में प्रमुख गुप्तचर संस्था के डायरेक्टर को ही अपराधी बना कर कटघरें में खड़ा किया जायेगा। यदि आपकी पार्टी गांधी के सत्य से किंचित भी सरोकार रखती है, तो भारत के गृहमंत्रालय को बताना पड़ेगा कि इशरत जहां लश्करे तैयाबा की फियादीन थी या नहीं? यदि थी, तो सीबीआर्इ इसको फर्जी मुठभेड़ क्यों बता रही है? निश्चय ही देश की प्रमुख जांच संस्था आपकी पार्टी के नेताओं के इशारे पर झूठ बोल रही है। स्पष्ट है आपका सत्य और स़िद्धान्तों से कोर्इ मतलब नहीं है। आप गांधी विचारधारा का मुखौटा पहन कर अपनी असली सूरत को छुपाने की निष्फल कोशिश कर रहे हैं।
मुखौटा पहनने से कुरुप और भद्दा चेहरा छुपता नहीं है। जनता ने एक भ्रष्ट पार्टी के असली  चेहरे को अच्छी तरह देख लिया है और उसके मन में उसके प्रति वितृष्णा भर गयी है। अब चाहे गांधी विचारधारा का मुखौटा पहनो या गांधी सरनेम लगाओं- गांधी से अपने आपको नहीं जोड़ सकते। गांधी का क्षणांश भी अब पार्टी में नहीं बचा है। अत: जनता को और अधिक मूर्ख बनाने का प्रयोजन पार्टी के शीर्षस्थ नेता को त्याग देना चाहिये। उनके विशिष्ट अनुचरों को अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिये, क्योंकि उनकी कर्कश वाणी अपने नेता को प्रसन्न कर सकती है, जनता को प्रभावित नहीं कर सकती।